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Friday, September 6, 2013

हिन्दी कवियों और उर्दू शायरों का संगम "काव्य-कुम्भ" का पहला भाग तैयार

 टीकम म्युज़िक बैंक  प्रस्तुत हिन्दी कवियों और उर्दू शायरों का संगम  "काव्य-कुम्भ"

हिन्दी हास्यकवि अलबेला खत्री द्वारा स्थापित टीकम म्युज़िक बैंक  के  पहले  ऑडियो एल्बम " काव्य-कुम्भ " में  अनवर फारुकी, कलाम आज़र , महबूब आलम,  शाहजहाँ शाद,  पूनम गुजरानी, संगीता अग्रवाल, अज्ञानी कवि, चंद्रशेखर प्रसाद व पारस सोनी को शामिल किया गया है .

कविता के मंच पर मौलिक कविता  के अभाव को देखते हुए  कुछ पुराने कवियों को सम्मान देने और कुछ नितान्त नए रचनाकारों को  प्रोत्साहन देने के लिए निर्मित काव्य-कुम्भ  का पहला भाग बन कर तैयार है और जल्द ही इसका लोकार्पण समारोह  होगा .




जय हिन्द !

Wednesday, August 28, 2013

Friday, August 23, 2013

surat ke mukesh khordia bhi kamal karte hain


राय देने में अपने लोगों का कोई जवाब नहीं .........लेकिन  कई बार  राय देने वाला  जब अपनी ही बात पर अमल करता नहीं दिखता तो हँसी छूट जाती है . एक किस्सा कल हुआ . मैं अपने परममित्र  मुकेश खोरडिया यानी  युवा समाजसेवी  मुकेश अग्रवाल के साथ उनके कार्यालय में बैठा था . उनके कुछ और मित्र भी थे .  बात चली  खानपान व आहार-विहार की तो मुकेश भाई ने  एक घंटा तक  मुझे लेक्चर दिया कि  समोसे मत खाया करो, कचोरी मत खाया करो, चाय कम पिया करो, बीड़ी  बिलकुल मत पिया करो इत्यादि .

ऐसा उन्होंने इसलिए कहा कि मैं जब भी जाता हूँ उनके यहाँ तो  चाय और समोसे  ज़रूर  मंगवाता हूँ .  मुकेश भाई ने अंकुरित मूंग और चना  रोज़ सुबह खाने के कई लाभ बताये और  फिर  एक टिफिन खोला  जिसमे  अंकुरित मूंग, चना  के अलावा  खजूर, अंगूर, पपीता  इत्यादि के कई डिब्बे थे . मैंने और सी पी  ने खाना शुरू किया लेकिन मुकेश जी ने नहीं खाए . मैंने कहा - खाओ आप भी  ?   इस बात पर वे ज़ोरों से हँसे  और  सुरती स्टाइल में बड़ी वाली गाली दे के बोले -  आज मैंने समोसे और कचोरी खा लिए ....हा हा हा
my best friend mukesh khordia with atul tulsyan ji

Saturday, August 10, 2013

वो बोली - चुपचाप पी लो जैसे अडवानी जी अपने आंसू पी रहे हैं

आज सुबह सुबह जैसे मैंने प्याला हाथ में लिया तो चाय का रंग कुछ फीका सा लगा . मैंने गुड्डू की माँ से पूछा - क्या बात है आज चाय पत्ती बहुत कम डाली है चाय में ..एक दम रंगहीन सी दिख रही है मनमोहन सिंह की तरह ... तो वो बोली - आज चाय नहीं मसाला दूध दिया है . चुपचाप पी लो जैसे अडवानी जी अपने आंसू पी रहे हैं .

मैंने कहा दूध क्यों, चाय क्यों नहीं ? वो बोली -आज आपका त्यौहार है दूध पीने वाला . मैंने पूछा मेरा कौन सा त्यौहार ? बोली नाग पंचमी ....हा हा हा

जय हिन्द !